Saturday, November 16, 2013

तू है मनचला

तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला

कहाँ से तू आता, किस ओड़ चला जाता
जाते जाते अपनी छाप, हर ओड़ छोड़ जाता
तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला

तेरी हसीं के ठहाके, तेरी गुदगुदाती वो बातें
तेरे वो सपने दिखाना, फिर उन्हें सच कर जाना
तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला

रास्तों का तू राजा, साथियों का शहज़ादा
दिलों में समां जाता, नींदों को उड़ा जाता
तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला

वो तेरा रूठ जाना, फिर किसी के पास न आना
इंतज़ार में रहना सब आएँगे, मना कर तुझे ले जायेंगे
तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला

केहता है तू न जाएगा, गया भी तो वापस आएगा
पर सच कहूँ , अब होता नहीं है भरोसा
कर भी लूँ क्या पता, मुझे तू किस हाल में पाएगा

तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला।
तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला  । ।


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