Saturday, November 16, 2013

तू है मनचला

तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला

कहाँ से तू आता, किस ओड़ चला जाता
जाते जाते अपनी छाप, हर ओड़ छोड़ जाता
तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला

तेरी हसीं के ठहाके, तेरी गुदगुदाती वो बातें
तेरे वो सपने दिखाना, फिर उन्हें सच कर जाना
तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला

रास्तों का तू राजा, साथियों का शहज़ादा
दिलों में समां जाता, नींदों को उड़ा जाता
तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला

वो तेरा रूठ जाना, फिर किसी के पास न आना
इंतज़ार में रहना सब आएँगे, मना कर तुझे ले जायेंगे
तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला

केहता है तू न जाएगा, गया भी तो वापस आएगा
पर सच कहूँ , अब होता नहीं है भरोसा
कर भी लूँ क्या पता, मुझे तू किस हाल में पाएगा

तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला।
तू है मनचला, न जाने  किस ओड़ चला  । ।


Saturday, October 26, 2013

दिल में बस जाने की , ये एक छोटीसी आदत है मेरी

दिल में बस जाने की , ये एक छोटीसी आदत है मेरी।।

तुम्हारी जुबा पर जो नाम,हर वक़्त रहता है,
कम्बक्त दिलो दिमाग पर वो,न जाने कैसा असर करता है।।
कोशिशो के पुल, तुमने खूब ये बांधे,
मेरी लहर क आगे, कोई अब तक न सांधे ।।

तुम किस सोच में हो, कहीं ये गुस्ताखी तो नहीं,
दुनिया ये न बोले, कहीं ये कोई नादानी तो नहीं ।।
इस रोज़ की दौड़ में, कुछ लत ऐसी होती है,
पीछा जितना छुडाओ, छुडाए न छुटती है ।।

अब ध्यान से सुनों मेरी, हर एक बात,
सच आज कहेंगे, मेरे हर एक अल्फाज़।।
करना भरोसा इन पर, तुम्हारी ख्वाइश है,
ये न समझना, मेरी ऐसी कोई फरमाइश है ।।

भूलते भुलाते याद करवाने की, ये एक शरारत है मेरी,
कितनी भी कोशिस कर लो, कुछ ऐसी हीं फितरत है मेरी।।
बस अब बांध लो, इस बात को गाँठ कि,
दिल में बस जाने की , ये एक छोटीसी आदत है मेरी।।