एक दोस्त मिला है जीवन में,
जो करता सदा अपनी हीं बात;
होता कुछ न उसके मन में,
पर कर जाता दिल को आघात.
एक दोस्त मिला है जीवन में,
जो करता सदा अपनी हीं बात;
दिन आते जाते जो भी हों,
कर लेता सब को अपने साथ;
पर जब मन करता उसके अहम् को,
कर देता सब बन्धनों से आज़ाद.
एक दोस्त मिला है जीवन में,
जो करता सदा अपनी हीं बात;
हर रूप रंग में घुस जाता,
करने लगता जीवन आसन;
पर अनचाहे इस आदत से,
उलझनों में फंस जाता नादान .
एक दोस्त मिला है जीवन में,
जो करता सदा अपनी हीं बात;
सोचता हु ये है कौन? दोस्त या कोई दुसमन
पर फिर याद आते हैं अपने हीं अल्फाज़;
एक दोस्त मिला है जीवन में,
जो करता सदा अपनी हीं बात;
होता कुछ न उसके मन में,
पर कर जाता दिल को आघात.
* नोट: इस कविता में "अपनी हीं बात" का आशय "अपने मन की बात करने से है, मनमौजी होने से है"